हिन्दी रत्न 2026 – प्रसून जोशी

हिन्दी रत्न सम्मान 2026 से अलंकृत हुए पद्मश्री प्रसून जोशी

नई दिल्ली, 1 अगस्त। राजर्षि पुरुषोत्तमदास टंडन की जयंती के अवसर पर हिन्दी भवन में आयोजित समारोह में प्रख्यात साहित्यकार, गीतकार, चिंतक एवं प्रसार भारती के अध्यक्ष पद्मश्री प्रसून जोशी को ‘हिन्दी रत्न सम्मान 2026’ से अलंकृत किया गया। हिन्दी भाषा, साहित्य, भारतीय संस्कृति और जनसंचार के क्षेत्र में उनके बहुआयामी योगदान के लिए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।

समारोह की अध्यक्षता हिन्दी भवन के संस्थापक श्री प्रभात कुमार ने की तथा विशिष्ट वक्ता डॉ. अशोक चक्रधर ने प्रसून जोशी की मौलिकता, संवेदनशीलता और रचनात्मक दृष्टि की सराहना करते हुए उन्हें समकालीन हिन्दी का सशक्त स्वर बताया। कार्यक्रम में हिन्दी भवन की गौरवशाली यात्रा तथा प्रसून जोशी एवं रजत शर्मा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित विशेष दृश्य-श्रव्य प्रस्तुति भी प्रदर्शित की गई।

सम्मान की शुरुआत हिन्दी भवन की सह मंत्री डॉ. रत्नावली कौशिक द्वारा तिलक एवं रजत श्रीफल भेंट करने से हुई। इसके बाद हिन्दी भवन के न्यासी एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री राजीव जौहरी ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। न्यास के कोषाध्यक्ष हरिशंकर वर्मन ने सम्मान निधि प्रदान की। अंत में मुख्य अतिथि पद्मभूषण रजत शर्मा ने प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर ‘हिन्दी रत्न सम्मान 2026’ से अलंकृत किया।

अपने स्वीकृति भाषण में प्रसून जोशी ने कहा कि हिन्दी किसी कृत्रिम संरक्षण की नहीं बल्कि अपनी जड़ों से जुड़े सामूहिक विकास की भाषा है। उन्होंने कहा कि हिन्दी को टेक्निकल और स्टार्टअप की आवश्यकता नहीं है, उसे उसके असीम स्रोत तक जल, प्रकाश और रचनात्मक प्रवाह पहुँचाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी एक कौशल हो सकती है, लेकिन भाषा हमारी पहचान और हमारी माँ होती है। हिन्दी का भविष्य युवाओं के हाथ में है और उन्हें हिन्दी में सृजन, शोध तथा नवाचार को अपनाना चाहिए।

मुख्य अतिथि पद्मभूषण श्री रजत शर्मा ने कहा कि प्रसून जोशी ने हिन्दी को साहित्य, विज्ञापन, सिनेमा और जनसंचार के माध्यम से वैश्विक पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि हिन्दी आज विश्व मंच पर पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली भाषा के रूप में स्थापित हो रही है और प्रसून जोशी का योगदान इस यात्रा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने हिन्दी भवन से अपने आत्मीय संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि कैसे जीवन में हिन्दी भवन के पुस्तकालय ने उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस अवसर पर श्रीमती मालिनी अवस्थी एवं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रसून जोशी के नाम अपने शुभकामना संदेश प्रेषित किए। कार्यक्रम के अंत में हिन्दी भवन की ओर से ट्रस्ट डॉ. सुरेन्द्र मेहर ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनसमुदाय का आभार व्यक्त किया।